Eulogy

An eulogy on a very tragic incident that took place in the George Floyd event- RIP

इंसान बदल गया है

इंसान आदमी की औलाद कहलाता था
इंसान तामां माखलूकात से बेहतर था
उसका चेहरा काला तो दिल सफेद था
प्यार का चलन और इंसानियत माजहाब था
इंसान पेहला बड़ा ही खूबसुरत था
इंसान तामां माखलूकात से बेहतर था

हर चीज बदलती है वक़्त के साथ
पर इंसान क्यौ बदल गया वक़्त के साथ
इंसान तोह कोई चीज नहीं
कभी धरती से प्यार करता था
अब माल को सलाम करता
अब सामान से महोँबत करता
इंसान से नहीं
इंसान पेहले ऐसा तो नही था

वो मिटठी का बना है – कमज़ोर सा है
पेहले अपनी ज़म्मिर का पक्का था- अब नहीं
मेरा काला रंग ऊसको पसंद नहीं
कहता है मै कमतर हू उस जैसा नहीं
क्यौकी मिटठी का हू आग का नहीं
शायद उसकी मेरे ज़िन्दगी से हसद है
मेरे हस्त्ति से उसको जलन है
नफरत की आग मे मुझको दबौच लेंगा
मेरे सास्सों को ठौड देंगा
मेरे इंसानी फितरत को मरोड देंगा
धीरे धीरे मेरी ज़िन्दगी को बदल देंगा
नफरत की जीत, इंसानियत की हार कर देंगा

इंसान बदलने लगा हैं
उस के अब कई रुप हैं
मजहब के नाम पर कत्ल कर देता हैं
तो कभी झूठ को सच बता देता है
गल्ले मिलकर गरदनं पर वार कर देता है
भाई बोलकार दुश्शमनी बरत्ता हैं
आज कुछ तो कल कुछ बनजाता हैं
इंसान बहुत बदल गया है

इंसान पेहले ऐसा तो नहीं था
उसका चेहरा सफेद, दिल काला हैं
नफरत के बीज़ बोता, फसाद पैदा करता
इंसान से अब डर लगता हैं

सच की आवाज उसको पसंद नहीं
मेंरा कला रंग उसको पसंद नहीं
मेरी नादानिया उसको पसंद नहीं
मेरी खिलखिलाती हंस्सी उसको पसंद नहीं
आदमी की इंसानियत उसको पसंद नहीं
इंसानियत का तरिका उसको पसंद नहीं
ज़िन्दगी का सीधा रास्ता उसको पसंद नहीं
इंसान की फितरत ऐसे तो नहीं

इंसान आदमी की अौलाद थी
श्यतान तो नही
इंसान को अब इंसान पर भारोसा नहीं
एक दुसरे से नज़र मिलाता नही
ज़िस्म को मिटठी से साफ करता हैं
दिल मे लगे दाग धोता नहीं
अपनी ज़मीर की लक्कीर खीछता नहीं
अपनी खोयी पेहचान बनाता नहीं
अंधादुन्द भागता हैं, पलटता ही नहीं
अब बस करो, मुझपर रहम करो

इंसान को आदमी की औलाद ही रहने दो
श्यतान बन्ने से बचां लो
फिरसे ऊस्को खूबसुरत बैन दो
इंसान को इंसान से मिला दो

सच की आवाज को मत मारो
इंसान की इंसानियत को मत मारो
इंसानियत की जीत को मत मारो
इंसान को इंसांन ही रहने दो
उसे श्यतान बन्ने से बचां लो
इंसान को बदलने मत दो
इंसान को आदमी की औलाद ही रहने दो
इंसान की फितरत उसकी मिट्ठी हैं आग नहीं
इंसान कमज़ोर ही सही ऐहम जोश नहीं
इंसान को इंसान ही रहने दो
कभी बदलने मत दो

translate Google

© Banu Bidarkund

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